जब अगस्त्य मुनि ने समुंद्र का सारा जल पी लिया
एक समय था जब देवताओं के आग्रह पर अगस्त्य मुनि (Agastya Muni) ने सभी समुंदरों का जल पी लिया था ताकि देवता राक्षसों का वध कर सके ।
आज हम आपको उसकी कथा बताएँगे ।
राक्षस राज वृत्तासुर का वध
एक समय दैत्यों का राजा वृत्तासुर था जो देव राजा इंद्र व उनकी सेना पर आक्रमण करता रहता था। सभी देवता उससे परेशान थे इसलिये देव इंद्र ने महर्षि दधीचि की स्तुति कर उनकी हड्डियों से शक्तिशाली वज्र का निर्माण किया व वृत्तासुर का वध कर डाला । वृत्तासुर का वध होते ही दैत्य सेना में हाहाकार मच गया व सभी अपने जीवन की रक्षा करने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
सभी राक्षस समुंद्र में छुप गए
वृत्तासुर के वध के पश्चात दैत्यों के पास कोई राजा नही था तब सभी धरती पर अपना जीवन बचाने के लिए छुपने लगे लेकिन देवता उनको ढूंढ-ढूंढ कर मार रहे थे। इसलिये सभी दैत्यों ने समुंद्र के नीचे छुपने का सोचा ताकि देवता उन्हें ढूंढ ना सके। यह सोचकर सभी दैत्य समुंद्र की गहराइयों में जाकर छिप गए।
देवता हुयें परेशान
दैत्यों के समुंद्र में छिपे होने के कारण देवताओं को उन्हें ढूंढने में बहुत समस्या आ रही थी। चूँकि समुंद्र अति विशाल होने के साथ-साथ बहुत गहरा भी था व साथ ही पानी के अंदर देखा नही जा सकता था। इसलिये देवता दैत्यों का वध कर पाने में असमर्थ थे। साथ ही दैत्य रात्रि में समुंद्र से बाहर निकल कर ऋषि मुनियों पर आक्रमण कर उन्हें खा जाते थे जिस कारण देवताओं की शक्ति कम होती जा रही थी।
सभी देवता गए भगवान विष्णु के पास
दैत्यों के छल से परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए व उनसे सहायता मांगी। भगवान विष्णु ने कहा कि दैत्यों को तभी मारा जा सकता हैं जब समुंद्र का जल सूख जाये । इसके लिए उन्होंने उपाय सुझाया कि पृथ्वी पर ही अगस्त्य मुनि नामक एक महान तपस्वी रहते है जो अपनी शक्ति से समुंद्र के जल को पीकर उसे सुखा सकते है ।
देवताओं ने मांगी अगस्त्य मुनि से सहायता
भगवान विष्णु से आदेश पाकर सभी देवता अगस्त्य मुनि से सहायता मांगने गए। जब ऋषि अगस्त्य ने देवताओं की समस्या सुनी तब वे उनकी सहायता करने को तैयार हो गए । वे सभी देवताओं के साथ समुंद्र के तट पर गए व अपने हाथ से जल लेकर पीने लगे ।
देखते ही देखते सारे समुंद्र का जल समाप्त हो गया व दैत्य उसमे साफ दिखने लगे। दैत्यों के बाहर आते ही सभी देवताओं ने उन पर भीषण आक्रमण कर दिया व सभी का वध कर दिया। कुछ दैत्य डरकर वहां से भागकर पुनः पाताल लोक चले गए।
इस प्रकार अगस्त्य मुनि ने समुंद्र का जल पीकर देवताओं व ऋषि मुनियों की सहायता की व दैत्यों का अंत करवाया। जब देवताओं ने राक्षसों का वध करने के पश्चात अगस्त्य मुनि से समुंद्र का जल वापस लौटाने को बोला तो उन्होंने इसमें असमर्थता दिखाई व उन्हें बताया कि अब वह सारा जल पच चुका है।
देवता गए भगवान ब्रह्मा के पास
सभी देवता अगस्त्य मुनि के द्वारा समुंद्र का जल ना लौटा पाने के कारण भगवान ब्रह्मा से सहायता मांगने गए तब भगवान ब्रह्मा ने बताया कि कुछ समय के पश्चात भागीरथ (Bhagiratha) इस पृथ्वी पर आयेंगे व उनके तप से माँ गंगा का इस पृथ्वी पर आगमन होगा। उन्ही के जल से विश्व के सभी समुंद्र पुनः भर जायेंगे।

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