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14 प्रकार की तुल्य मृत्यु क्या है ?
यह कहानी नहीं है - स्वतंत्रता-पूर्व की बात है -वाराणसी के एक साधक थे 'सुदर्शन जी;
 जब अहमदशाह अब्दाली दिल्ली और मथुरा पर आक्रमण करता हुआ गोकुल तक आ गया था।
हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके, यह आम चलन था।
मेवाङ पर औरंगजेब के हमले के समय की बात है, बादशाह ने सांप के बिल में हाथ तो डाल लिया था, मगर अब बात संभालने में नहीं आ रही थी।
 पिता अपने बेटे के साथ पांच-सितारा होटल में प्रोग्राम अटेंड करके कार से वापस जा रहे थे। रास्ते में ट्रेफिक पुलिस हवलदार ने सीट बैल्ट नहीं लगाने पर रोका और चालान बनाने लगे।
 श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं
 एक गांव में भागवत कथा का आयोजन किया गया, पंडित जी भागवत कथा सुनाने आए। पूरे सप्ताह कथा वाचन चला। पूर्णाहुति पर दान दक्षिणा की सामग्री इक्ट्ठा कर घोडे पर बैठकर पंडितजी रवाना होने लगे।
गरुड़ पुराण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?
1695 में एक अजीब बुखार से मरने के बाद, आयरिश महिला मार्गरी मैकॉल को जल्दी से दफन कर दिया गया ताकि उसके शरीर से महामारी के प्रसार को रोका जा सके।
देवी धुमावती कौन हैं?
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