अयोध्या को केवल अयोध्या ही नहीं इस नाम से भी जानते हैं लोग, कुछ ऐसी अनसुनी बातें जिसे सुन यकीन नहीं होगा

अयोध्या भारत के सबसे पवित्र शहरों में से एक है। हालांकि, ऐसा हो भी क्यों न यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि जो है। यह शहर पवित्र सरयू नदी के तट पर स्थित है, जिसे कभी साकेत के नाम से भी जाना जाता था।


'गंगा बड़ी गोदावरी, तीर्थ बड़ों प्रयाग, सबसे बड़ी अयोध्या नगरी, जहां राम लियो अवतार...' भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या उत्तर प्रदेश राज्य की सबसे प्रसिद्ध नगरी है। मथुरा-हरिद्वार, काशी, उज्जैन, कांची और द्वारका की तरह अयोध्या को भी हिंदुओं के प्राचीन सात पवित्र स्थलों यानी सप्तपुरियों में से एक माना गया है। अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर कहा गया है, जिसकी तुलना स्वर्ग से की गई है।
धार्मिक ग्रंथ रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी, जो कई वर्षों तक रघुवंशी राजाओं की राजधानी भी रही। सरयू नदी के पूर्वी तट पर बसे अयोध्या नगरी का प्राचीन नाम साकेत है।

सूर्दशन चक्र पर बसी अयोध्या नगरी



स्कंद पुराण के अनुसार अयोध्या नगरी भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर बसी हुई है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने ब्रह्मा, मनु, देव शिल्पी विश्वकर्मा और महर्षि वशिष्ठ को अपने रामावतार के लिए भूमि चयन करने के लिए भेजा था, जिसके बाद भगवान विश्वकर्मा ने इस नगर का निर्माण किया।अयोध्या पर राज करने वाले राजा दशरथ अयोध्या के 63वें शासक थे।

अयोध्या का क्षेत्रफल

अयोध्या का विस्तार से वर्णन वाल्मीकि रामायण के 5 वें सर्ग में मिलता है। अयोध्या का क्षेत्रफल 2,522 वर्ग किमी है। यहां अवधी भाषा बोली जाती है। इस समय अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके लिए कई देशभर से लोग हजारों लाखों रुपए का चंदा भी दे रहे हैं। कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि जब से राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तब से अयोध्या एक पर्यटन स्थल भी बन चुका है।

कुश ने बसाई अयोध्या

धार्मिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम के धाम जाने के बाद अयोध्या नगरी वीरान हो गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान राम के साथ अयोध्या के कीट पतंगे तक भी उनके साथ चले गए थे। ऐसे में भगवान श्री राम के पुत्र कुश ने अयोध्या नगरी को दोबारा बसाया था। इसके बाद सूर्यवंशी की अगली 44 पीढ़ियों ने अयोध्या का अस्तित्व बरकरार रहा। मान्यताएं तो ऐसी भी हैं कि महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या एक बार फिर वीरान हो गई थी।

अयोध्या पर आक्रमण

मध्यकाल में अयोध्या नगरी मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रही। यहां पर महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की थी। 1526 ई. में बाबर के सेनापति ने 1528 ई. में अयोध्या में आक्रमण किया और यहां मस्जिद का निर्माण करवाया, जिसे 1992 राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान ध्वस्त कर दिया गया।






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