हाल ही में स्वामी रामभद्राचार्य ने हनुमान चालीसा की चौपाई का संसोधन किया कहा गलत तरीके से पाठ होता है क्या गोस्वामी तुलसीदास की कृति का ये संसोधन उचित है?


 स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज पर मैं टिप्पणी करने की धृष्टता नही कर रहा हूं लेकिन सिर्फ अपना मत रख रहा हूं।

  1. शंकर सुवन केसरी नंदन….
  2. राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा
  3. जो शत बार पाठ कर कोई
  4. सब पर राम तपस्वी राजा

के स्थान पर सुझाए विकल्प

  1. शंकर स्वयं केसरी नंदन
  2. राम रसायन तुम्हरे पासा सादर हो रघुपति के दासा
  3. यह शत बार पाठ कर जोई
  4. सब पर रामराज सिर ताजा

शंकर पुत्र, शंकर अंशधारी, स्वयं शंकर इन तीनों रूपों में मुझे विवाद नहीं दिखाई देता। मैं तीनों से संतुष्ट हूं ।

सादर रहो रघुपति के दासा … वाले मामले में मात्राओं के प्रबंधन में त्रुटि नहीं होती दिख रही है। तीसरी चौपाई में कोई जोई दोनों ही इच्छित अर्थ को बिगाड़ते नहीं। मेरा मत है कि हमारे सभी शास्त्र जो देवभाषा संस्कृत में नही हैं उनमें रामभद्राचार्य जी महाराज सरीखे विद्वानों के अनुसार परिवर्तन किया जा सकता है। 1966 की हनुमान चालीसा शिलालेख जो हनुमान गढ़ी अयोध्या में लगी है वह भी राम भद्राचार्य महाराज के विचार को समर्थन देती दिखती है।

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