महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के मुंह में सूंड इसलिए लगाकर रखते थे क्योंकि मुगलों की सेना में हाथी भी होते थे। उस वक्त मुगलों की सेना काफी बड़ी होती थी और मुगलों की सेना में कई हाथी होते थे। उसके मुकाबले मेवाड़ की सेना घोड़ों पर ज्यादा निर्भर थी और खुद महाराणा प्रताप भी घोड़े पर बैठकर ही युद्ध लड़ते थे।
ऐसे में महाराणा के चेतक पर हाथी की सूंड बांधी जाती थी, इससे घोड़ा भी हाथी की तरह दिखता था। माना जाता है कि जब कोई घोड़ा हाथी की सूंड लगाकर दूसरे हाथियों के सामने जाता था तो दूसरे हाथी उसे अपने बच्चे की तरह समझते थे और वो छोटा हाथी समझकर अटैक नहीं करते थे।
इससे महाराणा प्रताप को युद्ध में काफी फायदा होता था। वे चेतक पर बैठकर मुगलों के हाथियों को चकमा देकर उन पर हमला करते थे। चेतक भी एक बहुत ही बहादुर घोड़ा था और वह महाराणा प्रताप के साथ हर युद्ध में शामिल होता था।
हल्दी घाटी के युद्ध में भी चेतक ने महाराणा प्रताप का साथ दिया था। उस युद्ध में चेतक ने महाराणा प्रताप को कई बार मुगलों के हाथियों से बचाया था। अंत में, युद्ध के दौरान चेतक भी घायल हो गया और वीरगति को प्राप्त हो गया।
चेतक और महाराणा प्रताप की दोस्ती का इतिहास भारत के इतिहास में एक अमर गाथा है। दोनों ने एक-दूसरे के लिए अपना सब कुछ दिया और अपने साहस और वीरता से देश की रक्षा की।

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