उज्जैन में रात क्यों नहीं रुकता?


 ऐसी मान्यता है की उज्जैन के राजा केवल महाकाल हैं और कोई भी साधारण व्यक्ति या कोई राज काज से संबंधित व्यक्ति यदि बाहर से आकर रात को वंहा रुकता है तो उसे दंड भुगतना पड़ता है.

परंतु ये सिर्फ एक मान्यता भर है असल कारण इसका कुछ और ही है.

उज्जैन दरअसल तंत्र कार्य करने वालों का स्वर्ग है और वंहा उन्हीं लोगों का राज चलता है और उज्जैन जागता ही रात्रि को है. मैं कई बार उज्जैन गया हूँ और रात्रि को रुकता भी हूँ और मैंने स्वयं देखा है की उज्जैन रात्रि को ही जागता है और हर तरह के तांत्रिक कार्यों की शुरुआत संध्या समय के बाद ही होती है. एक बार मैं किसी धर्मशाला में रुका था तो संध्या होते ही वंहा लोगों की और महिलाओं की रोने की आवाज आने लगी जो शायद उनकी होती है जो किसी प्रेत बाधा से ग्रसित होते हैं.

कोई भी साधारण व्यक्ति रात्रि को वंहा रुके और घूमे फिरे तो किसी भी ऐसी जगह पर जा सकता है जहां से उसे प्रेत बाधा की परेशानी हो सकती है. ऐसे में उसे मुसीबत ही झेलनी पड़ेगी इसीलिये उज्जैन में रात्रि को रुकें परंतु बाहर घूमे फिरे नहीं.

रात्रि को अपने कमरे में ही विश्राम करना चाहिये.

ना केवल उज्जैन बल्कि ऐसा कोई भी स्थान जो तंत्र साधना का केंद्र हो वंहा रात्रि को बाहर घूमने नहीं जाना चाहिये क्यूंकि ऐसी जगहों पर रात्रि को नकारात्मक शक्तियां जागृत हो जाती हैं और इनसे किसी भी साधारण व्यक्ति को नुकसान हो सकता है. हां दिन में कोई दिक्कत नहीं.

कुछ ऐसे लोग भी दुनिया में होते हैं जिनकी नजरों में आने से हमेशा बचना चाहिये. ऐसी जगहों पर रात्रि को ऐसे लोग आपको बहुत मिलेंगे तो हमेशा सावधानी में ही सुरक्षा है.

आशा करता हूँ आपको कुछ समझा पाया हूँ.

धन्यवाद

हरे श्री महाकाल 🙏☘

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