भगवान राम की मृत्यु कब हुई ?


शास्त्रों के मुताबिक भगवान राम का जन्म ईसा से 5114 वर्ष पूर्व माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान राम की मृत्यु नहीं हुई थी बल्कि वो शरीर के साथ ही बैकुंठ गए थे. ऐसी मान्यता है कि माता सीता के लव-कुश के जन्म के बाद वो धरती में समा गईं. फिर भगवान राम माता सीता से बिछड़ने का गम बर्दाश्त नहीं कर पाए.

 हिन्दू धर्म के अनुसार, भगवान राम की मृत्यु की घटना अयोध्या की अयोध्या काण्ड में वर्णित है। रामायण के उत्तर काण्ड में राम अयोध्या में वापस लौटते हैं और वहां उनकी राजा बनाए जाने के बाद, उन्होंने आत्मा देवता से बुलवाकर अपनी मृत्यु का समय तय करने के लिए कहा।

भगवान राम की मृत्यु का समय उनकी पत्नी सीता के परीक्षण के बाद हुआ था। राम ने उन्हें शपथ दी कि वह सीता के शुद्धता को लोगों के समक्ष सिद्ध करेंगे, लेकिन जनता के बीच एक विवाद के बाद, राम ने सीता को अपने पास लाने का निर्णय लिया।

सीता ने अपनी पवित्रता को सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा में प्रवेश किया, और उसके बाद, आत्मा देवता ने अग्निदेव के साक्षात्कार के माध्यम से राम से मिलाया और उनकी आत्मा वापस बुलवाई। इसके बाद, राम ने अपनी राजधानी अयोध्या में चले जाने का निर्णय किया और वहां विस्तार से जीवन यापन किया। मृत्यु के बाद, भगवान राम की आत्मा विष्णु भगवान में मिल गई।

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