वासुकी नाग और शेषनाग में क्या अंतर है?

 ये दोनों ही नागमाता कद्रू के पुत्र हैं।

शेषनाग सभी नागों में ज्येष्ठ हैं और इनके एक हज़ार फन हैं। ये भगवान विष्णु के परम् भक्त हैं और उनके साथ बैकुंठ में निवास करते हैं। इनका लक्ष्मण और बलराम के रूप में धरती पर अवतरण हुआ है।

शेष नागों में सबसे शक्तिशाली हैं और क्रोधी स्वभाव के हैं, नागों समेत इनकी माता भी इनसे भयभीत रहती थीं। छल - कपट करने वाली माता के विरुद्ध इन्होंने सबकुछ त्याग दिया और भगवान विष्णु की शरण में चले गए।

वासुकी नाग - शेषनाग के बाद ये नागों के दूसरे ज्येष्ठ भ्राता हैं। ये सौ फन वाले नाग हैं और अपने ज्येष्ठ भ्राता शेषनाग से भी अधिक विषैले हैं, समस्त संसार में इन्हीं का विष सबसे घातक है।

शेषनाग के जाने के बाद इन्हें नागराज बनाया गया और इन्होंने युगों तक नागों पर राज किया।

तत्पश्चात् ये भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गए, इनके कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें अपने गले में धारण किया।


वासुकि नाग श्रीकृष्ण और वासुदेव की तूफ़ान में रक्षा करते हुए। 

वासुकि के जाने के बाद तक्षक को नागराज बनाया गया।


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