क्या आज भी धरती पर हनुमान जी हैं?

 एक सच्ची घटना सुना रहा हूं जो धरती पर हनुमानजी महाराज के साक्षात होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

पर मेरे गांव में स्थित हमारे कुलदेवता श्री हनुमान जी के मंदिर के दर्शन कीजिए आप पहले:


राजस्थान के सवाई माधोपुर डिस्ट्रिक्ट में मलारना डूंगर नाम का गांव है जो हमारे पूर्वजों का गांव है और वही डहरौली नामके स्थान पर यह मंदिर है।

मेरे परदादा और उनके परदादा के समय मतलब डेढ़ दो सौ साल से छोटे से चबूतरे पर हनुमान जी महाराज विराजे हुए थे, ये तो अभी कुछ वर्षों पहले ही भव्य मंदिर का निर्माण होने लगा है।

क्यों होने लगा है?

क्योंकि श्रीहनुमानजी महाराज ने एक भक्त के भाग्य रातों रात बदल दिए थे और उसी भक्त ने फिर मंदिर निर्माण कार्य करवाना शुरू किया है।

कुछ साल पहले एक भक्त (नाम सार्वजनिक नही कर सकता) जो जयपुर का एक बड़ा सफल व्यवसाई थे वे आर्थिक चक्रवात में फंस गए।

संकट इतना गहरा गया था की सम्मान बचाने के लिए आत्महत्या के सिवा कोई चारा नहीं बचा था।

उस भक्त को कुछ भी सूझ नही पड़ी और वो जयपुर से पहली बस लेकर सीधा मलारना डूंगर आया और आते ही डहरौली वाले बालाजी (हनुमानजी) के मंदिर पहुंच गया।

हमारे गांव के पंडितजी जो इस मंदिर में पूजा अर्चन करते है, उनकी आंखों देखी है की वो भक्त रात भर दीपक जलाए रोते रोते हाथ जोड़े श्रीहनुमान चालीसा का पाठ करता रहा, अनवरत पाठ करता रहा।

"जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरुदेव की नाई"

जाग्रत और साक्षात भक्तराज श्री हनुमान जी महाराज के सामने कोई बड़े से बड़ा पापी भी निश्चल भाव से पूरी श्रद्धा के साथ प्रार्थना करेगा तो उसके संकटों का नाश होना निश्चित है, फिर ये व्यापारी तो भक्त थे।

पंडितजी बताते है की सुबह छह बजे वे आरती करने मंदिर पहुंचे और उन्होंने वो व्यापारी भक्त को रोते हुए हनुमान चालीसा पाठ करते और दीपक जलते देखा।

इतने में उसी समय कही से उस व्यापारी को किसी का फोन आया और वो प्रभु को प्रणाम करके वो फोन सुनने मंदिर के बाहर गया।

फोन सुनकर जब वो वापस आया तब उसकी दशा किसी पागल के समान हो गई थी!

जोर जोर से वो "राम राम राम राम" बोलता हुआ ताली बजा बजा कर हंस रहा था और उसके नेत्रों से अविरल अश्रु बहे जा रहे थे।

पंडितजी ने उसको गले लगाया, शांत करवाया और पूछा की क्या बात है क्यों ऐसी दशा उसकी है?

"हनुमान जी ने बचा लियो म्हारे!"

बस वो व्यापारी भक्त इतना ही बोल पाया, आगे उसका गला रूंध गया और वो फिर से हनुमान चालीसा पाठ करके मौन कृतज्ञता प्रभु के सामने ज्ञापित करने लगा।

उस व्यापारी को ना जाने कहां से ऐसी आर्थिक सहायता मिली थी की वो उसके व्यापार के संकट से तो बाहर आया ही आया, साथ ही चार गुना व्यापार उसका बढ़ा।

एक रात्रि में बाजी पलट चुकी थी! मरने वाला जी उठा था! हारने वाला जीत गया था!

और उस व्यापारी ने ही फिर बड़े मन से मंदिर निर्माण कार्य आरम्भ करवाया जो अब अपनी पूर्णता पर है।

हमारे गांव का नाम राजस्थान में भी बहुत लोग नही जानते होंगे, देश की बात तो छोड़िए।

और उस भगत ने दुखित मन से जहां हनुमानजी को स्मरण किया उसी स्थान से हनुमानजी ने स्वयं आकर उसके कष्टों का अंत कर दिया।

देश के प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय हनुमान मंदिरों की मान्यताएं एवम् प्रत्यक्ष चमत्कारिक परिणामों के बारे में तो हमने बहुत सुना–देखा और अनुभव किया है पर इस सत्य घटना से हम समझे की प्रेम और श्रद्धा से उस राम भक्त को आप जहां भी स्मरण कर लेंगे वो वही प्रगट होकर आपके कष्टों का नाश कर देंगे।

वो सदैव है और सदैव रहेंगे।

यह ध्रुव सत्य है।

जय राम जी की🙏


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