कुंभकर्ण कोई साधारण दानव नही था, अपितु बहुत बड़ा वैज्ञानिक था। वो छह महीने तक अपनी प्रयोगशाला मे कार्यरत रहता था।
राक्षस रावण के पास अद्भुत और अद्वितीय उड़न विमान थे, जिसे बनाने का श्रेय कुंभकर्ण को जाता है। उसकी दोनो पत्नियां भी शोध कार्य मे उसकी मदद करती थी।
राक्षस कुंभकर्ण वेदों का भी ज्ञाता था, अत्यंत बुद्धिमान और समय से आगे की सोच रखने का गुण उसके अंदर उसके पिता से विरासत मे मिली थी।
आशुतोष राणा के शब्दों मे, " “कुंभकर्ण विकट योद्धा ही नहीं, एक महान वैज्ञानिक भी था. रावण के समस्त प्रयोग, वैज्ञानिक सूत्रों आविष्कारों को मूर्त रूप प्रदान करने का कार्य कुंभकर्ण किया करता था. उसके द्वारा किए जा रहे भीषण वैज्ञानिक आविष्कारों को संसार से गुप्त रखने के लिए रावण ने संपूर्ण जगत में प्रचारित कर दिया था कि उसका भाई वर्ष में छह मास निद्रामग्न रहता है। कुंभकर्ण की एकाग्रता अध्ययन, उसकी साधना में कोई किसी प्रकार का कोई व्यवधान न उत्पन्न हो सके इसके लिए रावण ने एक राजाज्ञा भी पारित कर दी थी कि कुंभकर्ण की निद्रा में व्यवधान पहुंचाने वाले व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जाएगा।"
मेरे विचार से कुंभकर्ण वैज्ञानिक के साथ साथ दूरदर्शी भी था, उसने अपने भाई रावण को स्पष्ट रूप से कह दिया था कि, "श्री राम की पत्नी को आदरपूर्वक लौटा दो, वरना आपके साथ साथ लंका का विनाश भी निश्चित है"।
कुंभकर्ण की यंत्र मानव कला को ‘ग्रेट इंडियन' पुस्तक में ‘विजार्ड आर्ट' का दर्जा दिया गया है।
अस्वीकरण; मैं वाल्मीकि कृत रामायण का सम्मान करती हू। बस एक अलग तथ्य जो पढ़ा उसे लिख दिया। ये आवश्यक नहीं कि, ये सत्य ही हो। मुझे इसकी प्रमाणिकता के विषय मे कुछ भी नही पता। 🙏🙏 ये दावा नही सिर्फ आशुतोष जी द्वारा कही पंक्तियों की प्रस्तुति मात्र है।
स्तोत्र ये जानकारी आशुतोष राणा की पुस्तक रामराज्य से ली गई है।

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