रावण का पुत्र कौन था जिसे हनुमानजी भी नहीं हारा पाए?


 रावण का पुत्र अतिकाय एक अत्यंत बलशाली योद्धा था। वह अपने पिता रावण की तरह ही अत्यंत अहंकारी और क्रूर था। उसका वध लक्ष्मण ने किया था।

अतिकाय रावण की दूसरी पत्नी दम्यमालिनी का पुत्र था। वह अपने पूर्व जन्म में दैत्य कैटव था जिसका अंत स्वयं प्रभु नारायण के हाथों हुआ था। वह अपने पूर्वजन्म में जितना बलशाली था, उतना ही बलशाली वह अपने इस जन्म में भी था।

अतिकाय के पास ब्रह्मा जी से प्राप्त एक ब्रह्म कवच था जो उसे दिव्यास्त्रों के प्रहार से बचाता था। वह अपने बल और ब्रह्म कवच के बल पर किसी को भी पराजित कर सकता था।

रामायण के युद्ध में, जब रावण की सेना ने श्री राम और उनकी सेना को रोकने की कोशिश की, तो अतिकाय ने श्री राम और लक्ष्मण को युद्ध में चुनौती दी। लक्ष्मण ने अतिकाय से युद्ध किया, लेकिन वह उसे पराजित नहीं कर सके।

तब हनुमान जी ने लक्ष्मण की मदद करने का फैसला किया। हनुमान जी ने लक्ष्मण को अपने कंधे पर बैठा लिया और उन्हें आसमान में ले गए। फिर हनुमान जी ने अतिकाय पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। ब्रह्मास्त्र ने अतिकाय के ब्रह्म कवच को भेद दिया और उसे मार डाला।

अतिकाय का वध एक महत्वपूर्ण मोड़ था रामायण के युद्ध में। इसने रावण की सेना को कमजोर किया और श्री राम की जीत की संभावनाओं को बढ़ा दिया।

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