पिनाक धनुष की कथा व्यास रचित मूल महाभारत के अनुशासनपर्व में देखने को मिलती है। यह कथा भगवान् शिव और मां पार्वती के संवाद के रूप में लिखी गई है।
मां पार्वती भगवान् शिव से पिनाक धनुष को लेकर सवाल करती हैं। भगवान् शिव तब अपने धनुष के उत्पत्ति की कथा सुनाते हैं जी कि इस प्रकार से है -
एक बार कण्व मुनि ब्रह्मा जी की तपस्या कर रहे थे। इससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उनको कोई वर देने के लिए प्रकट हुए। उनको वर देने के बाद ब्रह्मा जी ने वहां पर एक बांस देखा और उसके उपयोग का विचार किया।
ब्रह्मा जी ने जगत की भलाई को ध्यान में रखते हुए उस बांस से तत्काल दो धनुष तैयार किए - एक भगवान् शिव के लिए जो पिनाक नाम से जाना गया और दूसरा विष्णु जी के लिए को शारंग नाम से विख्यात हुआ। जो बचा कुचा बांस था, उससे गांडीव धनुष की रचना हुई जो आगे चलकर अर्जुन के धनुष के रूप में जाना गया।

0 टिप्पणियाँ