जब घटोत्कच महाभारत युद्ध में राक्षस बनकर रात्रि में युद्ध कर रहा था तो कर्ण को ही क्यों सभी कौरव योद्धाओं ने युद्ध करने को कहा, जबकि उनके पास अश्वत्थामा, द्रोण, कृपाचार्य जैसे योद्धा थे, तो कर्ण की क्या आवश्यकता थी?


 उस रात्रि युद्ध में स्वयं श्री कृष्ण और अर्जुन ने घटोत्कच को कर्ण के साथ युद्ध करने को भेजा था जब कर्ण अकेले ही पांडवों की सेना का संहार कर रहे थे। खुद श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि कर्ण के पास इंद्र की शक्ति होने के कारण घटोत्कच को ही कर्ण के समक्ष भेजना उचित रहेगा। इसका एक और कारण यह भी था कि घटोत्कच राक्षस होने के कारण रात्रि में भयंकर मायावी युद्ध करने की भी क्षमता रखता था।

इसके बाद कर्ण और घटोत्कच के बीच भयंकर संग्राम हुआ। घटोत्कच की माया का कर्ण ने हर वक्त सफ़लतापूर्वक प्रतिकार किया। रात का समय और माया का सहारा होने पर भी घटोत्कच कर्ण पर भारी न पड़ सका। जब घटोत्कच ने मायावी युद्ध करना शुरू किया, तब कर्ण के अलावा अन्य कौरव वीर रणभूमि से पीछे हट गए। संजय ने धृतराष्ट्र से युद्ध का वर्णन करते हुए कहा -

उद्धरण -

नरेश्वर! उस अत्यन्त भयंकर और उग्र संग्रामको देखकर आपके पुत्र और योद्धा भयभीत होकर भाग चले ⁠।⁠।⁠ ४० ⁠।⁠।

अपने अस्त्रबलकी प्रशंसा करनेवाला एकमात्र अभिमानी कर्ण ही वहाँ खड़ा रहा। उसके मनमें तनिक भी व्यथा नहीं हुई। उसने अपने बाणोंसे घटोत्कचद्वारा निर्मित मायाको नष्ट कर दिया ⁠।⁠।⁠ ४१ ⁠।⁠।

स्रोत : घटोत्कच वध पर्व, गीता प्रेस गोरखपुर

अपनी हर माया को नष्ट होता देख घटोत्कच ने अंततः एक घोर एवं दारुण माया का सहारा लिया। तब कौरव योद्धाओं के आग्रह करने पर कर्ण ने घटोत्कच पर इंद्र प्रदत्त शक्ति से वार करके उसका वध कर डाला।

अर्थात् इस प्रश्न के उत्तर स्वरूप मैं कहना चाहूंगा कि श्री कृष्ण ने ही घटोत्कच को कर्ण के समक्ष युद्ध करने को भेजा था। इसके अलावा उस घोर रात्रि युद्ध में घटोत्कच के माया को देख कर अन्य सभी कौरव वीर युद्ध से विमुख हो गए थे। इसलिए केवल कर्ण को अकेले ही घटोत्कच का सामना करना पड़ा था।

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